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संक्रांति सर्वस्व - सूर्य संक्रमण एवं पुण्यकाल निर्णय का शास्त्रीय विवेचन

संक्रांति सर्वस्व – सूर्य संक्रमण एवं पुण्यकाल निर्णय का शास्त्रीय विवेचन

संक्रांति सर्वस्व – सूर्य संक्रमण एवं पुण्यकाल निर्णय का शास्त्रीय विवेचन : संक्रांति पुण्यकाल निर्धारण का विस्तृत शास्त्रीय विवेचन। मुहूर्त चिन्तामणि, निर्णय सिंधु और कृत्यसारसमुच्चय के आधार पर रात्रि संक्रांति, मकर व कर्क संक्रांति के सूक्ष्म गणितीय नियमों का अद्वितीय संकलन।

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नववर्षं नवचैतन्यं ददातु - नववर्ष 2026 किसका नववर्ष है, किसे बधाई दें, क्या बधाई दें - New Year 2026

नववर्षं नवचैतन्यं ददातु – नववर्ष 2026 किसका नववर्ष है, किसे बधाई दें, क्या बधाई दें – New Year 2026

नववर्षं नवचैतन्यं ददातु – नववर्ष 2026 किसका नववर्ष है, किसे बधाई दें, क्या बधाई दें – New Year 2026 – ईसाइयों का नया साल है हिन्दुओं का नहीं। 1 जनवरी से शुरू होने वाला नया साल ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian Calendar) पर आधारित है, जिसे वैश्विक स्तर पर प्रशासनिक और व्यावसायिक कार्यों के लिए अपनाया गया है। अतः 1 जनवरी को जिसे हम लोग भी नववर्ष के रूप में मनाने लगे हैं यह एक भ्रम है और इसे समझना आवश्यक है कि किसका नववर्ष है, किसे बधाई दें, क्या बधाई दें ?

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अग्नि वास चार्ट - Agni Was Chart 2027

अग्नि वास चार्ट – Agni Was Chart 2027

अग्नि वास चार्ट – Agni Was Chart 2027 : जनवरी 2027 से दिसम्बर 2027 तक : अग्नि वास चार्ट जनवरी, अग्नि वास चार्ट फरवरी, अग्नि वास चार्ट मार्च, अग्नि वास चार्ट अप्रैल, अग्नि वास चार्ट मई, अग्नि वास चार्ट जून, अग्नि वास चार्ट जुलाई

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अग्नि वास चार्ट - Agni Was Chart 2026

अग्नि वास चार्ट – Agni Was Chart 2026

अग्नि वास चार्ट – Agni Was Chart 2026 : जनवरी 2026 से दिसम्बर 2026 तक : अग्नि वास चार्ट जनवरी, अग्नि वास चार्ट फरवरी, अग्नि वास चार्ट मार्च, अग्नि वास चार्ट अप्रैल, अग्नि वास चार्ट मई, अग्नि वास चार्ट जून, अग्नि वास चार्ट जुलाई

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भारतीय काल गणना (kaalchakra) की अद्भुत व्यवस्था - अहोरात्र, मास, वर्ष, दिव्यवर्ष, युग, महायुग, मन्वंतर, कल्प

भारतीय काल गणना (kaalchakra) की अद्भुत व्यवस्था – अहोरात्र, मास, वर्ष, दिव्यवर्ष, युग, महायुग, मन्वंतर, कल्प

भारतीय काल गणना (kaalchakra) की अद्भुत व्यवस्था – अहोरात्र, मास, वर्ष, दिव्यवर्ष, युग, महायुग, मन्वंतर, कल्प : भारतीय शास्त्रों, विशेषकर ‘सूर्य सिद्धांत’, ‘मनुस्मृति’ और ‘श्रीमद्भागवत व अन्य पुराणों’ में काल (समय) की गणना अत्यंत सूक्ष्म और वैज्ञानिक है। किन्तु इसे सही-सही समझना थोड़ा कठिन कार्य है जिसे यहां हम सरलता से समझने का प्रयास करेंगे। यहाँ समय रेखीय (Linear) न होकर चक्रीय (Cyclical) है और इसी कारण कालचक्र शब्द प्रयुक्त होता है। यहाँ भारतीय शास्त्रों के अनुसार युग व्यवस्था और मानवीय व दैवीय वर्षों के गणित पर विस्तृत आलेख प्रस्तुत है।

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भूमि शयन विचार - bhumi shayan vichar

भूमि शयन विचार – bhumi shayan vichar

भूमि शयन विचार – bhumi shayan vichar : भारतीय ज्योतिष शास्त्र और वास्तुशास्त्र में ‘भूमि शयन’ (bhumi shayan) एक ऐसी अवस्था है जो नक्षत्रों की शक्ति या काल की विशिष्ट प्रकृति के कारण पृथ्वी से संबंधित कार्यों (जैसे नींव खोदना, गृह निर्माण, खनन) के लिए निष्क्रिय या अशुभ मानी जाती है। यह अवस्था सीधे किसी एक नक्षत्र के नाम से नहीं, अपितु सूर्य-गोचर के सापेक्ष चन्द्र नक्षत्र के द्वारा निर्धारित होती है। यहां हम भूमि शयन विचार को शास्त्रोक्त प्रमाण के आधार पर समझने का प्रयास करेंगे।

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