# प्रज्ञा पञ्चाङ्ग > Drik Panchang (Digital) ## Posts - [नववर्षं नवचैतन्यं ददातु - नववर्ष 2026 किसका नववर्ष है, किसे बधाई दें, क्या बधाई दें - New Year 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/new-year-2026/): नववर्षं नवचैतन्यं ददातु - नववर्ष 2026 किसका नववर्ष है, किसे बधाई दें, क्या बधाई दें - New Year 2026 - ईसाइयों का नया साल है हिन्दुओं का नहीं। 1 जनवरी से शुरू होने वाला नया साल ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian Calendar) पर आधारित है, जिसे वैश्विक स्तर पर प्रशासनिक और व्यावसायिक कार्यों के लिए अपनाया गया है। अतः 1 जनवरी को जिसे हम लोग भी नववर्ष के रूप में मनाने लगे हैं यह एक भ्रम है और इसे समझना आवश्यक है कि किसका नववर्ष है, किसे बधाई दें, क्या बधाई दें ? - [अग्नि वास चार्ट - Agni Was Chart 2027](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-chart-2027/): अग्नि वास चार्ट - Agni Was Chart 2027 : जनवरी 2027 से दिसम्बर 2027 तक : अग्नि वास चार्ट जनवरी, अग्नि वास चार्ट फरवरी, अग्नि वास चार्ट मार्च, अग्नि वास चार्ट अप्रैल, अग्नि वास चार्ट मई, अग्नि वास चार्ट जून, अग्नि वास चार्ट जुलाई - [अग्नि वास चार्ट - Agni Was Chart 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-chart-2026/): अग्नि वास चार्ट - Agni Was Chart 2026 : जनवरी 2026 से दिसम्बर 2026 तक : अग्नि वास चार्ट जनवरी, अग्नि वास चार्ट फरवरी, अग्नि वास चार्ट मार्च, अग्नि वास चार्ट अप्रैल, अग्नि वास चार्ट मई, अग्नि वास चार्ट जून, अग्नि वास चार्ट जुलाई - [भारतीय काल गणना (kaalchakra) की अद्भुत व्यवस्था - अहोरात्र, मास, वर्ष, दिव्यवर्ष, युग, महायुग, मन्वंतर, कल्प](https://panchang.karmkandsikhen.in/kaalchakra/): भारतीय काल गणना (kaalchakra) की अद्भुत व्यवस्था - अहोरात्र, मास, वर्ष, दिव्यवर्ष, युग, महायुग, मन्वंतर, कल्प : भारतीय शास्त्रों, विशेषकर 'सूर्य सिद्धांत', 'मनुस्मृति' और 'श्रीमद्भागवत व अन्य पुराणों' में काल (समय) की गणना अत्यंत सूक्ष्म और वैज्ञानिक है। किन्तु इसे सही-सही समझना थोड़ा कठिन कार्य है जिसे यहां हम सरलता से समझने का प्रयास करेंगे। यहाँ समय रेखीय (Linear) न होकर चक्रीय (Cyclical) है और इसी कारण कालचक्र शब्द प्रयुक्त होता है। यहाँ भारतीय शास्त्रों के अनुसार युग व्यवस्था और मानवीय व दैवीय वर्षों के गणित पर विस्तृत आलेख प्रस्तुत है। - [अग्नि वास चार्ट दिसम्बर - Agni Was December 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-december-2026/): अग्नि वास चार्ट दिसम्बर - Agni Was December 2026 : मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अष्टमी से पौष कृष्ण पक्ष अष्टमी तक - [अग्नि वास चार्ट नवम्बर - Agni Was November 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-november-2026/): अग्नि वास चार्ट नवम्बर - Agni Was November 2026 : कार्तिक कृष्ण पक्ष सप्तमी से मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष सप्तमी तक - [भूमि शयन विचार - bhumi shayan vichar](https://panchang.karmkandsikhen.in/bhumi-shayan-vichar/): भूमि शयन विचार - bhumi shayan vichar : भारतीय ज्योतिष शास्त्र और वास्तुशास्त्र में 'भूमि शयन' (bhumi shayan) एक ऐसी अवस्था है जो नक्षत्रों की शक्ति या काल की विशिष्ट प्रकृति के कारण पृथ्वी से संबंधित कार्यों (जैसे नींव खोदना, गृह निर्माण, खनन) के लिए निष्क्रिय या अशुभ मानी जाती है। यह अवस्था सीधे किसी एक नक्षत्र के नाम से नहीं, अपितु सूर्य-गोचर के सापेक्ष चन्द्र नक्षत्र के द्वारा निर्धारित होती है। यहां हम भूमि शयन विचार को शास्त्रोक्त प्रमाण के आधार पर समझने का प्रयास करेंगे। - [अग्नि वास चार्ट अक्टूबर - Agni Was October 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-october-2026/): अग्नि वास चार्ट अक्टूबर - Agni Was October 2026 : आश्विन कृष्ण पक्ष पंचमी से कार्तिक कृष्ण पक्ष षष्ठी तक - [अग्नि वास चार्ट सितम्बर - Agni Was September 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-september-2026/): अग्नि वास चार्ट सितम्बर - Agni Was September 2026 : भाद्र कृष्ण पक्ष चतुर्थी से आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी तक - [अग्नि वास चार्ट अगस्त - Agni Was August 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-august-2026/): अग्नि वास चार्ट अगस्त - Agni Was August 2026 : श्रावण कृष्ण पक्ष तृतीया से भाद्र कृष्ण पक्ष तृतीया तक - [अग्नि वास चार्ट जुलाई - Agni Was July 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-july-2026/): अग्नि वास चार्ट जुलाई - Agni Was July 2026 : आषाढ़ कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से द्वितीय श्रावण कृष्ण पक्ष द्वितीया तक - [अग्नि वास चार्ट जून - Agni Was Jun 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-jun-2026/): अग्नि वास चार्ट जून - Agni Was Jun 2026 : अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से द्वितीय ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक - [अग्नि वास चार्ट मई - Agni Was May 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-may-2026/): अग्नि वास चार्ट मई - Agni Was May 2026 : वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक - [अग्नि वास चार्ट अप्रैल - Agni Was April 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-april-2026/): अग्नि वास चार्ट अप्रैल - Agni Was April 2026 : चैत्र शुक्ल पक्ष चतुर्दशी से वैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तक - [अग्नि वास चार्ट मार्च - Agni Was March 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-march-2026/): अग्नि वास चार्ट मार्च - Agni Was March 2026 : फाल्गुन शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से चैत्र शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तक - [अग्नि वास चार्ट फरवरी - Agni Was February 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-february-2026/): अग्नि वास चार्ट फरवरी - Agni Was February 2026 : माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वादशी तक - [अग्नि वास चार्ट जनवरी - Agni Was January 2026](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-january-2026/): अग्नि वास चार्ट जनवरी - Agni Was January 2026 : पौष शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से माघ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तक - [ग्रहों का स्वरूप - grahon ka swaroop](https://panchang.karmkandsikhen.in/grahon-ka-swaroop/): ग्रहों का स्वरूप - grahon ka swaroop : सारावली एक आधुनिक ज्योतिष ग्रंथ है, जिसके रचनाकार कल्याण वर्मा हैं। सारावली में में ग्रहों के स्वरूप का विशेष वर्णन मिलता है। यदि हम ग्रहों के स्वरूप को समझना चाहें तो इसमें सारावली अवलोकनीय है। पूर्व आलेख में हम ग्रहों के स्वरूप की संक्षिप्त चर्चा कर चुके हैं यहाँ सारावली के प्रमुख बिन्दुओं के आधार पर ग्रहों के स्वरूप का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है: - [ग्रह परिचय : ग्रहों के वर्ण, लिंग, रंग आदि - grah parichay](https://panchang.karmkandsikhen.in/grah-parichay/): ग्रह परिचय : ग्रहों के वर्ण, लिंग, रंग आदि - grah parichay : जातक ज्योतिष में हमारे लिये ग्रहों के बारे में विस्तृत जानकारी अपेक्षित है जिसमें से यहां ग्रह परिचय (वर्ण, लिंग, रंग आदि) की चर्चा यहां की गयी है। - [Shadbala - कुंडली में बली ग्रह की पहचान करने के लिये षड्बल कैसे निकालते हैं ?](https://panchang.karmkandsikhen.in/shadbala/): Shadbala - कुंडली में बली ग्रह की पहचान करने के लिये षड्बल कैसे निकालते हैं : षड्बल के बिना कुंडली का विश्लेषण अधूरा माना जाता है। केवल ऋषि सूत्रों पर नहीं, गणितीय विधि एवं ग्रंथों के शुद्ध सिद्धांतों के आधार से षड्बल का सही निर्णय ही फलादेश की प्रमाणिकता को सूक्ष्म बनाता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में घटित होने वाली घटनाओं की सटीकता बढ़ जाती है। - [ज्योतिष में ग्रहों की दृष्टि का विचार कैसे करते हैं - grah drishti](https://panchang.karmkandsikhen.in/grah-drishti/): ज्योतिष में ग्रहों की दृष्टि का विचार कैसे करते हैं - grah drishti : जो ग्रह जिस भाव अथवा जिस ग्रह को देख रहा हो वह उससे प्रभावित होता है और इसके लिये ग्रह दृष्टि विचार का ज्ञान होना आवश्यक होता है। यहां हम ग्रहों की दृष्टि का विचार कैसे करते हैं इसे समझने का प्रयास करेंगे। - [कुंडली में पंचधा मैत्री क्या है, कैसे विचार करते हैं - panchadha maitri](https://panchang.karmkandsikhen.in/panchadha-maitri/): कुंडली में पंचधा मैत्री क्या है, कैसे विचार करते हैं - panchadha maitri : पंचधा मैत्री को समझने के लिये हमें सर्वप्रथम इसके निर्धारण के दो प्रकारों को समझना होगा। ग्रहों की मैत्री दो प्रकार की होती है एक नैसर्गिक मैत्री और दूसरी तात्कालिक मैत्री और इन दोनों को समझने के पश्चात् ही पंचधा मैत्री विचार किया जा सकता है, पंचधा मैत्री चक्र का निर्माण किया जा सकता है। - [ग्रहों की उच्च और नीच राशि, त्रिकोण, स्वगृह एवं उनके फल विचार - uccha nich grah](https://panchang.karmkandsikhen.in/uccha-nich-grah/): ग्रहों की उच्च और नीच राशि, त्रिकोण, स्वगृह एवं उनके फल विचार - uccha nich grah : ज्योतिष शास्त्र में फलादेश करने के लिये ग्रहों का विशेष अध्यययन आवश्यक होता है और इसमें अनेकानेक विचार अनिवार्य होते हैं यथा : उच्च, नीच, मूलत्रिकोणी, स्वगृही, मित्रगृही, रिपुगृही आदि। - [ग्रहों की जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति अवस्था और उनके फल - jagrat swapna sushupti](https://panchang.karmkandsikhen.in/jagrat-swapna-sushupti/): ग्रहों की जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति अवस्था और उनके फल - jagrat swapna sushupti : ग्रहों की अवस्था में दीप्तादि अवस्था, बालादि अवस्था का विचार मुख्यतः किया जाता है जिसका वर्णन बृहत्पराशरहोराशास्त्रम् में मिलता है। इसके साथ ही एक अन्य अवस्था का भी वर्णन मिलता है जो जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति (jagrat swapna sushupti) अवस्था है। - [ग्रहों की अवस्थाएं (graho ki avastha) : बाल, कुमार, युवा, वृद्ध और मृत](https://panchang.karmkandsikhen.in/graho-ki-avastha/): ग्रहों की अवस्थाएं (graho ki avastha) : बाल, कुमार, युवा, वृद्ध और मृत - ग्रहों की अवस्था को दो प्रकार की होती है एक वयावस्था (बालादि) और दूसरी भावनात्मक या मानसिक (दीप्तादि), यहां हम ग्रहों के इसी बालादि अवस्था को समझने का प्रयास करेंगे और ज्योतिष ग्रंथों में इसके क्या वर्णन हैं उनको भी समझने का प्रयास करेंगे। - [ग्रहों की अवस्था (grahon ki avastha) : दीप्त, स्वस्थ, प्रमुदित, शांत, दीन, दुःखित, विकल, खल और कुपित](https://panchang.karmkandsikhen.in/grahon-ki-avastha/): ग्रहों की अवस्था (grahon ki avastha) : दीप्त, स्वस्थ, मुदित, शान्त, शक्त, निपीडित, भीत, विकल, खल - - [आषाढ़ मास का पंचांग 2026, 1 Jul 2026 - 30 Jun 2026, Ashadh maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/ashadh-maas-ka-panchang/): आषाढ़ मास का पंचांग 2026, 1 Jul 2026 - 30 Jun 2026, Ashadh maas ka panchang : शुद्ध १२/०७/२०२६ से अशुद्ध,, ग्रीष्म ऋतु, सौम्यगोल, सौम्यायन, पश्चिम काल - [द्वितीय ज्येष्ठ मास का पंचांग 2026, 1 Jun 2026 - 30 Jun 2026, 2nd Jyeshtha maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/2nd-jyeshtha-maas-ka-panchang/): द्वितीय ज्येष्ठ मास का पंचांग 2026, 1 Jun 2026 - 30 Jun 2026, 2nd Jyeshtha maas ka panchang : अशुद्ध, ग्रीष्म ऋतु, सौम्यगोल, सौम्यायन, पश्चिम काल - [प्रथम ज्येष्ठ मास का पंचांग 2026, 2 May 2026 - 31 May 2026, 1st Jyeshtha maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/1st-jyeshtha-maas-ka-panchang/): प्रथम ज्येष्ठ मास का पंचांग 2026, 2 May 2026 - 31 May 2026, 1st Jyeshtha maas ka panchang : शुद्ध, वसंत ऋतु १५/०५/२०२६ से ग्रीष्म ऋतु, सौम्यगोल, सौम्यायन, दक्षिण काल १५/०५/२०२६ से पश्चिम काल - [वैशाख मास का पंचांग 2026, 3 Apr 2026 - 1 May 2026, Vaishakh maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/vaishakh-maas-ka-panchang/): वैशाख मास का पंचांग 2026, 3 Apr 2026 - 1 May 2026, Vaishakh maas ka panchang : शुद्ध, वसंत ऋतु, याम्यगोल १४/०४/२०२६ से सौम्यगोल, सौम्यायन, दक्षिण काल - [चैत्र मास का पंचांग 2026, 4 Mar 2026 - 2 Apr 2026, Chaitra maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/chaitra-maas-ka-panchang/): चैत्र मास का पंचांग 2026, 4 Mar 2026 - 2 Apr 2026, Chaitra maas ka panchang : शुद्ध, शिशिर ऋतु १४/०३/२०२६ से वसंत ऋतु, याम्यगोल, सौम्यायन, दक्षिण काल - [फाल्गुन मास का पंचांग 2026, 2 Frb 2026 - 3 Mar 2026, Falgun maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/falgun-maas-ka-panchang/): फाल्गुन मास का पंचांग 2026, 2 Frb 2026 - 3 Mar 2026, Falgun maas ka panchang : अशुद्ध ४/२/२०२६ से शुद्ध, शिशिर ऋतु, याम्यगोल, सौम्यायन, पूर्व काल १२/०२/२०२६ से दक्षिण काल - [माघ मास का पंचांग 2026, 4 Jan 2026 - 1 Frb 2026, Magh maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/magh-maas-ka-panchang/): माघ मास का पंचांग 2026, 4 Jan 2026 - 1 Frb 2026, Magh maas ka panchang : अशुद्ध, हेमंत ऋतु, याम्यगोल, याम्यायन, १४/०१/२०२६ से शिशिर ऋतु, सौम्यायन, पूर्व काल - [पौष मास का पंचांग 2025, 5 Dec 2025 - 3 Jan 2026, Paush maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/paush-maas-ka-panchang/): पौष मास का पंचांग 2025, 5 Dec 2025 - 3 Jan 2026, Paush maas ka panchang : शुद्ध ८/१२/२०२५ से अशुद्ध, हेमंत ऋतु, याम्यगोल, याम्यायन, पूर्व काल - [मार्गशीर्ष मास का पंचांग 2025, 6 Nov 2025 - 4 Dec 2025 Margshirsha maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/margshirsha-maas-ka-panchang/): मार्गशीर्ष मास का पंचांग 2025, 6 Nov 2025 - 4 Dec 2025 Margshirsha maas ka panchang : शुद्ध, शरद ऋतु १६/११/२०२५ से हेमंत ऋतु, याम्यगोल, याम्यायन, उत्तर काल १६/११/२०२५ से पूर्व काल - [कार्तिक मास का पंचांग 2025, 8 Oct 2025 - 5 Nov 2025 Kartik maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/kartik-maas-ka-panchang/): कार्तिक मास का पंचांग 2025, 8 Oct 2025 - 5 Nov 2025 Kartik maas ka panchang : दिनांक ८/१०/२०२५ से २१/१०/२०२५ तक, शुद्ध, शरद ऋतु, सौम्य गोल १७/१०/२०२५ से याम्यगोल, याम्यायन, उत्तर काल - [आश्विन मास का पंचांग 2025, 8 Sep 2025 - 7 Oct 2025 Ashwin maas ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/ashwin-maas-ka-panchang/): आश्विन मास का पंचांग 2025, 8 Sep 2025 - 7 Oct 2025 Ashwin maas ka panchang : आश्विन मास का पंचांग 2025 : शक १९४७, संवत २०८२, दिनांक ८/०९/२०२५ से ७/१०/२०२५ तक, अशुद्ध १६/०९/२०२५ तक तदनन्तर शुद्ध, वर्षा ऋतु १६/०९/२०२५ तक तदनन्तर शरद ऋतु, सौम्य गोल, याम्यायन, उत्तर काल - [भाद्रपद मास का पंचांग 2025, 10 Aug 2025 - 7 Sep 2025 Bhadra mah ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/bhadra-mah-ka-panchang/): भाद्रपद माह का पंचांग 2025, 10 Aug 2025 - 7 Sep 2025 Bhadra mah ka panchang : शक १९४७, संवत २०८२, दिनांक १०/०८/२०२५ से ७/०९/२०२५ तक, शुद्ध, ग्रीष्म ऋतु, सौम्य गोल, याम्यायन, काल - पश्चिम, (१६/०८/२०२५ से अशुद्ध) - [श्रावण माह का पंचांग 2025, 11 Jul 2025 - 9 Aug 2025 Shravan mah ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/shravan-2025/): श्रावण माह का पंचांग 2025, 11 Jul 2025 - 9 Aug 2025 Shravan mah ka panchang : श्रावण मास का पंचांग 2025 : शक १९४७, संवत २०८२, दिनांक ११/०७/२०२५ से ९/०८/२०२५ तक, शुद्ध, ग्रीष्म ऋतु, सौम्य गोल, सौम्यायन, काल - पश्चिम, (१६/०७/२०२३ से वर्षा ऋतु, याम्यायन) - [अग्नि वास चार्ट दिसंबर - Agni Was December 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-december-2025/): अग्नि वास चार्ट दिसंबर - Agni Was December 2025 : मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी से पौष शुक्ल पक्ष द्वादशी तक, दिसंबर 2025 में कुल 22 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 8 दिन है। - [अग्नि वास चार्ट नवम्बर - Agni Was November 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-november-2025/): अग्नि वास चार्ट नवम्बर - Agni Was November 2025 : कार्तिक शुक्ल पक्ष दशमी से मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी तक, नवम्बर 2025 में कुल 24 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 5 दिन है। - [अग्नि वास चार्ट अक्टूबर - Agni Was October 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-october-2025/): अग्नि वास चार्ट अक्टूबर - Agni Was October 2025 : आश्विन शुक्ल पक्ष नवमी से कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी तक, अक्टूबर 2025 में कुल 25 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 7 दिन है। - [अग्नि वास चार्ट सितम्बर - Agni Was September 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-september-2025/): अग्नि वास चार्ट सितम्बर - Agni Was September 2025 : भाद्र शुक्ल पक्ष नवमी से आश्विन शुक्ल पक्ष अष्टमी तक, सितम्बर 2025 में कुल 20 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 9 दिन है। - [अग्नि वास चार्ट अगस्त - Agni Was August 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-august-2025/): अग्नि वास चार्ट अगस्त - Agni Was August 2025 : श्रावण शुक्ल पक्ष अष्टमी से भाद्र शुक्ल पक्ष अष्टमी तक, अगस्त 2025 में कुल 23 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 11 दिन है। - [अग्नि वास चार्ट जुलाई - Agni Was July 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-july-2025/): अग्नि वास चार्ट जुलाई - Agni Was July 2025 : आषाढ़ शुक्ल पक्ष षष्ठी से श्रावण शुक्ल पक्ष सप्तमी तक - [अग्नि वास चार्ट जून - Agni Was Jun 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-jun-2025/): अग्नि वास चार्ट जून - Agni Was Jun 2025 : ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष षष्ठी से आषाढ़ शुक्ल पक्ष पंचमी तक - [घात चक्र क्या होता है आईये जानते हैं - ghat chakra](https://panchang.karmkandsikhen.in/ghat-chakra/): घात चक्र क्या होता है आईये जानते हैं - ghat chakra : व्यक्ति के जीवन में घाट चक्र (ghat chakra) का भी बड़ा महत्व होता है और इस कारण से जन्मपत्रिका में अर्थात जन्मकुंडली में घात चक्र का भी वर्णन और विचार किया जाता है। शास्त्रों में कुछ विशेष मास, तिथि, नक्षत्र, राशि योग, करण, प्रहर घातक होते हैं और घात चक्र द्वारा हम इन्हें समझ सकते हैं कि जातक के लिये कौन-कौन घातक है। - [अवकहड़ा चक्र क्या होता है व देखने की विधि : avakhada chakra](https://panchang.karmkandsikhen.in/avakhada-chakra/): अवकहड़ा चक्र क्या होता है व देखने की विधि : avakhada chakra : प्रायः अवकहड़ा भी बोलते सुनते देखा जाता है किन्तु ये अवकहड़ा नहीं अवकहडा है। आर्य मातृका से वर्ण लिया गया है जिसका दो वर्ग होता है ४ - ४ वर्णों का और ५ - ५ वर्णों का। अवकहडा में ५ - ५ वर्णों का वर्ग लिया गया है जो इस प्रकार है अवकहड, मटपरत, नयभजख और गसदचल। - [नक्षत्र के चरण कैसे जाने अर्थात कैसे निकालें - nakshatra ke charan](https://panchang.karmkandsikhen.in/nakshatra-ke-charan/): नक्षत्र के चरण कैसे जाने अर्थात कैसे निकालें - nakshatra ke charan : यदि जन्मपत्रिका न भी बनानी हो मात्र जन्मकाल का विवरण अंकित करना हो अर्थात जब जातक के जन्म होने पर पंडित जी से पतरा दिखाया जाता है तो भी चरण ज्ञात होना आवश्यक होता है। - [दशम लग्न, भाव मध्य, भाव संधि कैसे बनाते हैं ~ bhav chalit kundali](https://panchang.karmkandsikhen.in/bhav-chalit-kundali/): दशम लग्न, भाव मध्य, भाव संधि कैसे बनाते हैं ~ bhav chalit kundali : सामान्य रूप से चलित कुंडली नहीं बनायी जाती है किन्तु जिन्हें चलित कुंडली भी बनानी हो उन्हें सर्वप्रथम दशम लग्न साधन, भाव स्पष्ट अथवा भाव मध्य, भाव संधि आदि ज्ञात करके भाव विस्तार को समझना आवश्यक होता है। - [षडवर्ग क्या है, सप्तवर्गीय जन्मपत्रिका व षोडश वर्ग कुंडली कैसे बनाते हैं : shodash varga kundali](https://panchang.karmkandsikhen.in/shodash-varga-kundali/): षडवर्ग क्या है, सप्तवर्गीय जन्मपत्रिका व षोडश वर्ग कुंडली कैसे बनाते हैं : shodash varga kundali : जातक ज्योतिष में अतिसूक्ष्म विचार करने अथवा फलादेश करने के लिये सामान्य जन्म कुंडली, राशि कुंडली और नवांश कुंडली से आगे बढ़ने पर षोडश वर्ग कुंडली (shodash varga kundali) तक का विचार किया जाता है एवं यहां इन सबको एक साथ समझने का प्रयास करेंगे। - [नवमांश कुंडली कैसे बनाते हैं - navmansh kundli](https://panchang.karmkandsikhen.in/navmansh-kundli/): नवमांश कुंडली कैसे बनाते हैं - navmansh kundli : यदि षोडश वर्ग अथवा षड्वर्ग न भी बनाया जाय तो भी बहुत सारे ज्योतिषी नवांश कुंडली बनाते हैं। इस आलेख में नवांश कुंडली क्या है यह बताया गया है, नवांश कुंडली कैसे बनायी जाती है यह भी बताया गया है एवं सीखने के लिये उदाहरण भी दिया गया है। - [स्थानीय प्रथम लग्न सारणी निर्माण विधि - lagna sarani nirman](https://panchang.karmkandsikhen.in/lagna-sarani-nirman/): स्थानीय प्रथम लग्न सारणी निर्माण विधि - lagna sarani nirman : स्थानीय लग्न सारणी उपलब्ध न होने के कारण निकटतम स्थानों की बनी लग्न सारणी जो पंचांगों में उपलब्ध होती है से लग्न ज्ञात करना होता है जो कई स्थितियों में त्रुटिपूर्ण भी हो सकता है। इसलिये स्पष्ट लग्नानयन हेतु स्थानीय लग्नसारणी की आवश्यकता होती है और इस आलेख में स्वयं ही स्थानीय लग्नसारणी का निर्माण कैसे कर सकते है बताया गया है। - [स्वोदय विधि से शुद्ध लग्न निकालने की विधि - lagna kaise nikalte hain](https://panchang.karmkandsikhen.in/lagna-kaise-nikalte-hain/): स्वोदय विधि से शुद्ध लग्न निकालने की विधि - lagna kaise nikalte hain : स्पष्ट लग्नानयन के लिये अक्षांश से पलभा, पलभा से चरखण्ड, लंकोदय में चरखण्ड संस्कार करके स्वोदय मान, सायन सूर्य भुक्तांश तदनन्तर भुक्त लग्न अंशादि ज्ञात किया जाता है। आलेख में पूरी विधि उदाहरण सही बताई गयी है। - [लग्नानयन : अक्षांश से पलभा, पलभा से चरखण्ड और चरखंड से स्वोदय मान कैसे बनायें - palbha charkhand swoday](https://panchang.karmkandsikhen.in/palbha-charkhand-swoday/): लग्नानयन : अक्षांश से पलभा, पलभा से चरखण्ड और चरखंड से स्वोदय मान कैसे बनायें - palbha charkhand swoday : लग्न यदि शुद्ध न हो तो कुंडली भी त्रुटिपूर्ण हो सकती है। यदि षड्वर्ग, सप्तवर्ग, षोडशवर्ग आदि बनाना हो तब तो शुद्ध लग्न ज्ञात करना अनिवार्य हो जाता है। शुद्ध लग्न ज्ञात करने के लिये स्वोदय मान का प्रयोग करना आवश्यक होता है। इस आलेख में अक्षांश से पलभा बनाना, पलभा से चरखण्ड बनाना और फिर लंकोदय में चरखण्ड संस्कार पूर्वक स्वोदय बनाना बताया गया है। - [श्री वेंकटेश्वर शताब्दि पंचांग से जन्म पत्रिका बनाना सीखे ~ janam kundli banana sikhe](https://panchang.karmkandsikhen.in/janam-kundli-banana/): श्री वेंकटेश्वर शताब्दि पंचांग से जन्म पत्रिका बनाना सीखे ~ janam kundli banana sikhe : यहां हम एक जन्मपत्रिका का निर्माण विस्तृत विश्लेषण करते हुये करेंगे। इसमें चर मिनट से सूक्ष्म सूर्योदय ज्ञात करके उसके आधार पर इष्टकाल ज्ञात करेंगे, ग्रह स्पष्ट करेंगे, दशान्तर्दशा अंकित करेंगे। - [जन्मपत्री बनाने के लिये सर्वप्रथम सूर्योदय को सही करना सीखें ~ suryoday ka samay](https://panchang.karmkandsikhen.in/suryoday-ka-samay-2/): जन्मपत्री बनाने के लिये सर्वप्रथम सूर्योदय को सही करना सीखें ~ suryoday ka samay : यदि हम सारणी विधि से सूर्यक्रांति और चरमिनट ज्ञात करना सीख लें तो स्थानीय सूर्योदय ज्ञात करना सरल हो जायेगा और यदि सूक्ष्म स्थानीय सूर्योदय ज्ञात करना सीख लें तो इष्टकाल भी शुद्ध होगा। - [गणना का आधार सूर्योदय है तो स्थूल क्यों ~ suryoday ka samay](https://panchang.karmkandsikhen.in/suryoday-ka-samay/): गणना का आधार सूर्योदय है तो स्थूल क्यों ~ suryoday ka samay : पंचांगों में सूक्ष्म सूर्योदय ज्ञात करने की विधि बताई रहती है किन्तु हम उस विधि का अनुसरण नहीं करते अथवा गणितीय क्रियाओं से पीछा छुड़ाते हैं जिस कारण सूर्योदय स्थूल हो जाता है जबकि गणना का आधार सूर्योदय ही होता है क्योंकि इष्टकाल सूर्योदय से ही अंतर होता है अथवा ज्ञात होता है। - [आइये सही-सही चंद्र स्पष्ट करने की विधि जाने - chandra spast kaise kare](https://panchang.karmkandsikhen.in/chandra-spast-kaise-kare/): आइये सही-सही चंद्र स्पष्ट करने की विधि जाने - chandra spast kaise kare : अन्य ग्रहों की भांति अंश/कला/विकला नहीं होते और इसी कारण अन्य ग्रहों की भांति चंद्र स्पष्ट नहीं किया जा सकता अर्थात चंद्र स्पष्ट करने की दूसरी विधि होती है और किसी भी पंचांग से चंद्र स्पष्ट करना हो एक ही विधि है वो है नक्षत्र से चंद्र स्पष्ट करना। - [शताब्दि पंचांग से तात्कालिक ग्रह स्पष्ट करने की विधि - grah spast karana](https://panchang.karmkandsikhen.in/grah-spast-karana/): शताब्दि पंचांग से तात्कालिक ग्रह स्पष्ट करने की विधि - grah spast karana : शताब्दि पंचांग से जन्मपत्रिका निर्माण करने के लिये तात्कालिक ग्रह स्पष्ट करने की विधि का ज्ञान अनिवार्य है क्योंकि यदि लग्न ज्ञात करना है तो उसके लिये औदयिक सूर्य राश्यादि अपेक्षित है और अन्य ग्रह स्पष्ट करें अथवा न करें औदयिक सूर्य राश्यादि करने का तो ज्ञान होना ही चाहिये क्योंकि इसके बिना लग्नानयन नहीं किया जा सकता और लग्नानयन के बिना जन्म कुंडली नहीं बनायी जा सकती - [दैनिक ग्रह स्पष्ट से तात्कालिक ग्रह स्पष्ट करने की विधि - grah spast kaise kare](https://panchang.karmkandsikhen.in/grah-spast-kaise-kare/): दैनिक ग्रह स्पष्ट से तात्कालिक ग्रह स्पष्ट करने की विधि - grah spast kaise kare : यदि हम इससे विस्तृत जन्म पत्रिका बनाना चाहें तो हमें ग्रह स्पष्ट, भाव स्पष्ट आदि की भी आवश्यकता होती है और अब हम ग्रह स्पष्ट करना सीखेंगे। - [हृषीकेश पंचांग से जन्मपत्री कैसे बनाएं प्रथम भाग - janam patri nirman](https://panchang.karmkandsikhen.in/janam-patri-nirman/): हृषीकेश पंचांग से जन्मपत्री कैसे बनाएं प्रथम भाग - janam patri nirman : अब हम हृषीकेश पंचांग से एक जन्मपत्रिका निर्माण करके देखेंगे। - [हस्तलिखित जन्म पत्रिका बनाने की विधि प्रथम भाग - janam patrika kaise banaye](https://panchang.karmkandsikhen.in/janam-patrika-kaise-banaye/): हस्तलिखित जन्म पत्रिका बनाने की विधि प्रथम भाग - janam patrika kaise banaye : समय संस्कार, इष्टकालानयन, लग्नानयन, जन्मकुंडली निर्माण, चन्द्र कुण्डली निर्माण, भयात-भभोग साधन, महादशा भुक्त-भोग्य वर्षादि साधन, अन्तर्दशा साधन करते हुये एक साथ जन्मपत्रिका निर्माण की पूरी विधि को देखेंगे जन्म पत्रिका लिखना भी सीखेंगे। - [अंतर्दशा कैसे निकाले : अंतर्दशा साधन व अंकन विधि - antardasha kaise nikale](https://panchang.karmkandsikhen.in/antardasha-kaise-nikale/): अंतर्दशा कैसे निकाले : अंतर्दशा साधन व अंकन विधि - antardasha kaise nikale : इस आलेख में भुक्त-भोग्य वर्षादि के आधार पर गणना करते हुये वर्त्तमान अन्तर्दशा ज्ञात करने की विधि बताई गयी है और उसके दो उदाहरण भी दिये गये हैं। - [ज्योतिष सीखें : महादशा अंतर्दशा ज्ञात करने की विधि - mahadasha antardasha](https://panchang.karmkandsikhen.in/mahadasha-antardasha/): ज्योतिष सीखें : महादशा अंतर्दशा ज्ञात करने की विधि - mahadasha antardasha : दशाओं के अनेक प्रकार होते हैं जिसमें दो प्रमुख हैं विंशोत्तरी दशा और अष्टोत्तरी दशा। इसमें से विंशोत्तरी दशा का प्रचलन अधिक पाया जाता है। पराशर ने ग्रहों के फल काल हेतु विंशोत्तरी दशा बताया है। विंशोत्तरी दशा का तात्पर्य है १०० से २० अधिक अर्थात १२० वर्ष के आधार पर निर्धारित की गयी दशा। - [भयात भभोग निकालने की विधि जाने हिन्दी में - bhayat bhabhog calculator](https://panchang.karmkandsikhen.in/bhayat-bhabhog-calculator/): भयात भभोग निकालने की विधि जाने हिन्दी में - bhayat bhabhog calculator : जन्मपत्रिका में दशान्तर्दशा अंकित करने की आवश्यकता होती है जिसके लिये चंद्र नक्षत्र का भयात भभोग निकालना आवश्यक होता है। इसके साथ ही यदि चंद्र स्पष्ट करना हो अर्थात तात्कालिक चंद्र बनाना हो तो भी भयात भभोग को ज्ञात करना पड़ता है। - [राशि चक्र अर्थात चंद्र कुंडली निर्माण करना सीखें - chandra kundali](https://panchang.karmkandsikhen.in/chandra-kundali/): राशि चक्र अर्थात चंद्र कुंडली निर्माण करना सीखें - chandra kundali : जन्म पत्रिका में जन्म कुंडली/लग्न कुंडली निर्माण के पश्चात् राशि चक्र अर्थात राशि कुंडली अथवा चंद्र कुंडली निर्माण भी किया जाता है। लग्न कुंडली की भांति ही चंद्र कुंडली से भी फलादेश का विचार किया जाता है और राशिफल (rashifal) जो होता है वह चंद्र कुंडली से ही ज्ञात होता है। - [हृषीकेश पंचांग से जन्म कुंडली बनाना सीखे ~ janam kundli banana sikhe](https://panchang.karmkandsikhen.in/janam-kundli-banana-sikhe-2/): हृषीकेश पंचांग से जन्म कुंडली बनाना सीखे ~ janam kundli banana sikhe : वर्त्तमान काल में जन्म समय का भी सेकेंड दिया जाने लगा है भले ही वह अशुद्ध ही क्यों न हो। देशांतर हेतु हम सेकेंड का भी प्रयोग करते हैं तो बेलांतर के लिये भी हम सेकेंड का भी प्रयोग करेंगे और इसके लिये - [आओ झट-पट जन्म कुंडली बनाना सीखे ~ janam kundli banana sikhe](https://panchang.karmkandsikhen.in/janam-kundli-banana-sikhe/): आओ झट-पट जन्म कुंडली बनाना सीखे ~ janam kundli banana sikhe : मुहूर्त शोधन हेतु जब कुंडली बनाना होता है तो झट-पट कुंडली निर्माण की भी विधि है और विस्तृत जन्म कुंडली बनाना हो तो उसके लिये जटिल विधि भी है। - [सरलता से सीखें लग्न निकालने की विधि : lagna kaise nikale](https://panchang.karmkandsikhen.in/lagna-kaise-nikale/): सरलता से सीखें लग्न निकालने की विधि : lagna kaise nikale : सर्वप्रथम हम लग्न को समझेंगे और उसके ज्ञात करने की सरल विधि (सारणी विधि) को जानेंगे अर्थात दैनिक लग्न सारणी और प्रथम लग्न सारणी दोनों विधि से लग्न ज्ञात करना सीखेंगे। शुद्ध लग्नानयन अथवा सूक्ष्म लग्नानयन की गणितीय प्रक्रिया कुछ जटिल है जिसे अगले आलेखों में समझेंगे। - [पंचांग देखना कैसे सीखें - panchang dekhna sikhe](https://panchang.karmkandsikhen.in/panchang-dekhna-sikhe/): पंचांग देखना कैसे सीखें - panchang dekhna sikhe : आप ज्योतिष न भी सीखना चाहते हों तो भी आपको पंचांग देखने की जानकारी होना आवश्यक है। आप ज्योतिषी हैं अथवा नहीं, आप कर्मकांडी हैं अथवा नहीं आप मात्र धर्म में आस्था रखते हैं, धर्माचरण (व्रतादि) करते हैं तो आपको पंचांग का ज्ञान होना आवश्यक है। यदि आप पंचांग देखने की विधि सीखना चाहते हैं तो यह आलेख आपके लिये विशेष उपयोगी है क्योंकि यहां कई प्रमुख पंचांगों को देखने की विधि बताई गयी है। - [यहां सीखें इष्टकाल निकालने की पूरी विधि - ishtkaal kaise nikale](https://panchang.karmkandsikhen.in/ishtkaal-kaise-nikale/): यहां सीखें इष्टकाल निकालने की पूरी विधि - ishtkaal kaise nikale : हम एक पूर्व आलेख में भी इष्टकाल निकालने की विधि को समझ चुके हैं। इष्टकाल का तात्पर्य होता है वो वास्तविक समय जिसकी खगोलीय स्थिति आवश्यक है अर्थात ज्ञात करना चाहते हैं। - [ज्योतिष सीखें - अक्षांश और देशांतर, समय संस्कार](https://panchang.karmkandsikhen.in/deshantar-2/): ज्योतिष सीखें - अक्षांश और देशांतर, समय संस्कार : इष्टकाल बनाने की विधि जानने से पूर्व देशांतर-वेलांतर को जानना और समझना आवश्यक होता है। देशांतर को समझने के लिये रेखांश को समझना आवश्यक होता है एवं रेखांश को समझते समय अक्षांश को भी समझना चाहिये। जिससे समय परिवर्तन की गणितीय क्रिया संपन्न होती है; अक्षांश, रेखांश, देशांतर और वेलांतर संबंधी जानकारी यहां दी गयी है। - [समय परिवर्तन : घंटा मिनट को घटी पल में बदलना और घटी पल को घंटा मिनट में बदलने की विधि](https://panchang.karmkandsikhen.in/jyotish-ganit-2/): समय परिवर्तन : घंटा मिनट को घटी पल में बदलना और घटी पल को घंटा मिनट में बदलने की विधि : 2 घंटा 10 मिनट को घटी/पल में बदलने के लिये ढाई (2.5 अर्थात् 2½) से गुणा किया जिसका परिणाम 5 घटी 25 पल प्राप्त हुआ था। किन्तु इसमें हम और भी अनेकों प्रकार का उदाहरण समझेंगे और पुनः इसका विपरीत अर्थात घटी पल को घंटा मिनट में बदलने की विधि भी उदाहरण सहित समझेंगे। - [ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें - भाग 2](https://panchang.karmkandsikhen.in/jyotish-ganit/): ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें - भाग 2 : ज्योतिष गणित - Jyotish Ganit में यहां कुंडली बनाने की विधि से संबंधित गणितीय क्रियाओं को समझेंगे। घंटा-मिनट को दण्ड-पल बनाना, इष्टकाल निकालना, लग्नानयन अर्थात लग्न ज्ञात करना आदि समझेगें। इसके साथ ही स्थानीय समय, मानक समय, देशांतर, वेलांतर इत्यादि को भी समझने का प्रयास करेंगे। - [ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें - भाग 1](https://panchang.karmkandsikhen.in/jyotish-seekhen-1/): ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें - भाग 1 - jyotish seekhen : ज्योतिष विद्या वेदाङ्ग विद्या है और ज्योतिष सीखना एवं ज्योतिर्विद अथवा दैवज्ञ बनना दो भिन्न विषय है। ज्योतिष के तीन स्कंध कहे गये हैं सिद्धांत, संहिता और होरा। ज्योतिष सीखने का मुख्य तात्पर्य होरा के अंतर्गत कुंडली निर्माण करना और फलादेश करना समझा जाता है तथापि सामान्य ज्योतिषी बनने के लिये भी सिद्धांत व संहिता का भी सामान्य ज्ञान अनिवार्य होता है। - [आज का पंचांग शुभ मुहूर्त - aaj ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/aaj-ka-panchang/): आज का पंचांग शुभ मुहूर्त - aaj ka panchang : यहां दैनिक पंचांग अर्थात आज का पंचांग शुभ मुहूर्त सहित दिया जाता है जो प्रतिदिन मध्यरात्रि को परिवर्तित भी होता है। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, राशि, विभिन्न शुभ मुहूर्त, व्रत-पर्व आदि तो दिये ही जाते हैं इसके साथ ही कुछ और विशेष विषय भी समाहित किया गया है जो अन्यत्र नहीं दिया जाता किन्तु अति उपयोगी है, जैसे : गण्डान्त काल, सौर दिनांक, अर्द्धप्रहरा, शिववास, अग्निवास इत्यादि। इस कारण से प्रज्ञा पंचांग की उपयोगिता बढ़ जाती है। - [ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें - learn astrology in hindi](https://panchang.karmkandsikhen.in/learn-astrology-in-hindi/): ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें - learn astrology in hindi : यहां ज्योतिष सीखने में सहयोग हेतु आपको शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ सामग्रियां प्राप्त होंगी किन्तु जैसे आप चिकित्सा शास्त्र की पुस्तकों का अध्ययन करके चिकित्सक नहीं बन सकते उसी प्रकार ज्योतिष की पुस्तकों का अध्ययन मात्र करके ज्योतिषी नहीं बन सकते हैं। - [अग्नि वास चार्ट मई - Agni Was May 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-may-2025/): अग्नि वास चार्ट मई - Agni Was May 2025 : वैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्थी से ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी तक - [ज्योतिष: भूत, वर्तमान और भविष्य का संगम - jyotish kya hai](https://panchang.karmkandsikhen.in/jyotish-kya-hai/): ज्योतिष: भूत, वर्तमान और भविष्य का संगम - jyotish kya hai : ज्योतिष को कालज्ञान भी कहा जाता है, लगध के वेदाङ्ग ज्योतिष में "कालज्ञानं प्रवक्ष्यामि" मिलता है। कालज्ञान का तात्पर्य काल गणना, काल निर्धारण, शुभाशुभ काल आदि होता है। - [मकर संक्रांति 2025: तिथि, महत्व और उत्सव सब कुछ जानें](https://panchang.karmkandsikhen.in/makar-sankranti-2025/): मकर संक्रांति 2025: तिथि, महत्व और उत्सव सब कुछ जानें : मकर संक्रांति हर्षोल्लास का पर्व है, इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन आरंभ होता है। संक्रांति का पुण्यकाल विशेष उपयोगी होता है जिसमें स्नान-दान-पूजा आदि करना विशेष कल्याणकारी होता है। वर्ष 2025 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। - [अग्नि वास चार्ट अप्रैल - Agni Was April 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-april-2025/): अग्नि वास चार्ट अप्रैल - Agni Was April 2025 : चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया से वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तक - [आषाढ़ माह का पंचांग 2025, 12 Jun 2025 - 10 Jul 2025 Ashadha mah ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/ashadha-mah-ka-panchang/): आषाढ़ माह का पंचांग 2025, 12 Jun 2025 - 10 Jul 2025 Ashadha mah ka panchang : शक १९४७, संवत २०८२, दिनांक १२/०६/२०२५ से १०/०७/२०२५ तक, अशुद्ध, ग्रीष्म ऋतु, सौम्य गोल, सौम्यायन, काल - पश्चिम - [ज्येष्ठ माह का पंचांग 2025, 13 May 2025 - 11 Jun 2025 Jyeshtha mah ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/jyeshtha-mah-ka-panchang/): ज्येष्ठ माह का पंचांग 2025, 13 May 2025 - 11 Jun 2025 Jyeshtha mah ka panchang : शक १९४७, संवत २०८२, दिनांक १३/०५/२०२५ से ११/०६/२०२५ तक, शुद्ध, वसंत ऋतु, सौम्य गोल, सौम्यायन, काल - दक्षिण - [वैशाख माह का पंचांग 2025, 14 Apr 2025 - 12 May 2025 vaishakh mah ka panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/vaishakh-mah-ka-panchang-2025/): वैशाख माह का पंचांग 2025, 14 Apr 2025 - 12 May 2025 vaishakh mah ka panchang : वैशाख मास का पंचांग 2025 : शक १९४७, संवत २०८२, दिनांक १४/०४/२०२५ से १२/०५/२०२५ तक, शुद्ध, वसंत ऋतु, सौम्य गोल, सौम्यायन, काल - दक्षिण - [प्रज्ञा पंचांग : चैत्र मास का पंचांग 2025, 15 Mar 2025 - 13 Apr 2025 Chaitra Drik Panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/chaitra-2081-82/): प्रज्ञा पंचांग : चैत्र मास का पंचांग 2025, 15 Mar 2025 - 13 Apr 2025 Chaitra Drik Panchang : शक १९४६, संवत २०८१ - २०८२, दिनांक १५/०३/२०२५ से १३/०४/२०२५ तक, शुद्ध (१६ मार्च-२६ मार्च अशुद्ध तत्पश्चात पुनः शुद्ध), वसंत ऋतु, याम्य गोल, सौम्यायन, काल - दक्षिण - [शुभ मुहूर्त - Shubh Muhurt 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/shubh-muhurt-2025/): शुभ मुहूर्त - Shubh Muhurt 2025 : मुंडन मुहूर्त 2025, कर्णवेध मुहूर्त 2025, उपनयन मुहूर्त 2025, विवाह मुहूर्त 2025, द्विरागमन मुहूर्त 2025, गृहारम्भ मुहूर्त 2025, गृहप्रवेश मुहूर्त 2025, देवादि प्रतिष्ठा (प्राण प्रतिष्ठा) मुहूर्त 2025 - [अग्नि वास चार्ट मार्च - Agni Was March 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-march-2025/): अग्नि वास चार्ट मार्च - Agni Was March 2025 : फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा चैत्र से चैत्र कृष्ण पक्ष द्वितीया तक - [अग्नि वास चार्ट फरवरी - Agni Was February 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-february-2025/): अग्नि वास चार्ट फरवरी - Agni Was February 2025 : माघ शुक्ल पक्ष तृतीया से फाल्गुन कृष्ण पक्ष अमावास्या तक - [अग्नि वास चार्ट जनवरी - Agni Was January 2025](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-january-2025/): अग्नि वास चार्ट जनवरी - Agni Was January 2025 : पौष शुक्ल पक्ष द्वितीया से माघ शुक्ल पक्ष द्वितीया तक - [अग्नि वास चार्ट 2024 december - Agni Was 2024](https://panchang.karmkandsikhen.in/agni-was-2024/): अग्नि वास चार्ट 2024 december - Agni Was 2024 : दिसम्बर 2024 में कुल 25 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 6 दिन है। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अमावास्या से पौष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तक - [प्रज्ञा पंचांग : फाल्गुन मास 13 Feb 2025 - 14 Mar 2025 Falgun Drik Panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/falgun-2081/): प्रज्ञा पंचांग : फाल्गुन मास 13 Feb 2025 - 14 Mar 2025 Falgun Drik Panchang : शक १९४६, संवत २०८१, दिनांक १३/०२/२०२५ से १४/०३/२०२५ तक, शुद्ध, शिशिर ऋतु, याम्य गोल, सौम्यायन, काल - दक्षिण - [प्रज्ञा पंचांग : माघ मास 14 Jan 2025 - 12 Feb 2025 Magh Drik Panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/magh-2081/): प्रज्ञा पंचांग : माघ मास 14 Jan 2025 - 12 Frb 2025 Magh Drik Panchang : शक १९४६, संवत २०८१, दिनांक १४/१/२०२५ से १२/०२/२०२५ तक, शुद्ध, शिशिर ऋतु, याम्य गोल, सौम्यायन, काल - पूर्व - [प्रज्ञा पंचांग : पौष मास 16 Dec 2024 - 13 Jan 2025 Paush Drik Panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/paush-drik-panchang/): प्रज्ञा पंचांग : पौष माह 16 Dec 2024 - 13 Jan 2025 Paush Drik Panchang : शक १९४६, संवत २०८१, दिनांक १६/१२/२०२४ से १३/०१/२०२५ तक, अशुद्ध, हेमंत ऋतू, याम्य गोल, याम्यायन, काल - पूर्व - [प्रज्ञा पंचांग : मार्गशीर्ष माह 16 Nov 2024 - 15 Dec 2024 Margshirsha Drik Panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/pragya-panchang-margshirsh-2081/): प्रज्ञा पंचांग : मार्गशीर्ष 16 Nov 2024 - 15 Dec 2024 Margshirsha Drik Panchang, डिजिटल प्रज्ञा पंचांग मार्गशीर्ष माह जो कि दृक पंचांग भी है और पारंपरिक स्वरूप में भी है नीचे दिया गया है। यदि आपको पंचांग देखने में किसी प्रकार की समस्या हो तो पंचांग देखने की विधि पढ़ें। शक १९४६, संवत २०८१, दिनांक १६/११/२०२४ से १५/१२/२०२४ तक, शुद्ध, हेमंत ऋतू, याम्य गोल, याम्यायन, काल - पूर्व, - [देशांतर - Longitude](https://panchang.karmkandsikhen.in/deshantar/): देशांतर - Deshantar : सभी पंचांगों में किसी न किसी स्थान विशेष के अक्षांश और रेखांश के आधार पर गणना की जाती है एवं उसमें दिये गये सूर्योदय-सूर्यास्त उसी स्थान विशेष के होते हैं। उस स्थान के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर सूर्योदयास्त में 4 मिनट का प्रतिरेखांश होता है इसी अंतर को देशांतर कहा जाता है। - [प्रज्ञा पंचांग देखने की विधि - Panchang dekhne ki vidhi](https://panchang.karmkandsikhen.in/panchang-dekhne-ki-vidhi/): प्रज्ञा पंचांग देखने की विधि - Panchang dekhne ki vidhi : सभी पंचांगों की प्रथम सारणी में ऊपर के दाहिने कोने में मास, पक्ष, अयन, गोल, ऋतु, शुद्धाशुद्ध, काल दिशा एवं आंग्ल दिनांक आदि दिया जाता है। प्रज्ञा पंचांग में इसी का ध्यान रखते हुये ऊपर के दाहिने कोने में उपरोक्त विवरण दिया गया है। - [दृक पंचांग अर्थात् डिजिटल प्रज्ञा पंचांग की आवश्यकता - Need for Pragya Panchang/Drik Panchag](https://panchang.karmkandsikhen.in/need-for-pragya-panchang/): दृक पंचांग अर्थात् डिजिटल प्रज्ञा पंचांग की आवश्यकता - Need for Prajna Panchang : ऐसे दृक पंचांग (Drik Panchang) की आवश्यकता होती है जो उपयोगकर्ताओं के अनुकूल हो क्योंकि उपलब्ध दृक पंचांगों में अनेकों दोष देखे जाते हैं जिसके कारण उपयोगकर्ताओं के लिये ग्राह्य सिद्ध नहीं होते। इसी कारण प्रज्ञा पंचांग प्रकाशित किया जा रहा है जिसे अधिकाधिक दोषों का निवारण करते हुये उपयोगकर्ताओं के अनुकूल और सहज उपयोग के योग्य बनाने का प्रयास किया गया है। - [अदृश्य पंचांगों का खंडन - Rejection of nondrik panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/rejection-of-nondrik-panchang/): अदृश्य पंचांगों का खंडन - Rejection of nondrik panchang : वर्त्तमान में अधिकांश पंचांग सूर्यसिद्धांत अथवा आधारित सिद्धांतों से ही किया जाता है, किन्तु कालभेद से इसमें भी संस्कार की अपेक्षा है जिसकी उपेक्षा की जाती है और अदृश्यता की सिद्धि होती है। उपरोक्त स्थिति में अदृश्यता को ही ग्राह्य सिद्ध करने का प्रयास किया जाता है एवं प्रमाणों का भी भ्रमजाल बुना जाता है जिसमें स्वयं ही अदृश्य समर्थक फंस जाते हैं। - [दृक् पंचांग की आवश्यकता अथवा सिद्धि - Value of Drik Panchang](https://panchang.karmkandsikhen.in/value-of-drik-panchang/): दृक् पंचांग की आवश्यकता अथवा सिद्धि - Value of Drik Panchang : प्रमाणों एवं तर्क के आधार पर अंततः सिद्ध यही होता है कि दृश्य गणना ही स्वीकार्य है। प्राचीन काल में छाया-जलयंत्र आदि अनेक विधियों से दृश्य की पुष्टि की जाती थी आधुनिक काल में यदि सैटेलाइट है तो इससे पुष्टि होनी ही चाहिए। वही दृश्य गणना महत्वपूर्ण एवं ग्राह्य है जिसकी यंत्रादि से पुष्टि हो सके एवं आर्षमत में सदैव ऐसा आदेश भी किया गया है । ## Pages - [Contact](https://panchang.karmkandsikhen.in/contact/): हमसे संपर्क करें : दिए पते, ईमेल, संपर्क से सम्पर्क करें या इस संपर्क फॉर्म को भरें :  यह बेवसाइट वैयक्तिक रूप से संचालित की जाती है। हमारा किसी कम्पनी/फर्म/संस्था आदि से कोई सम्बन्ध नहीं है। किसी भी सूचना देने के लिए उपरोक्त ईमेल व चलभाष का ही प्रयोग किया जाता है । इसके अतिरिक्त अन्य किसी ईमेल या चलभाष का उपयोग नहीं किया जाता है। - [Privacy Policy](https://panchang.karmkandsikhen.in/privacy-policy/): अंतिम अद्यतन : 1 अक्टूबर, 2024 This Privacy Policy is an electronic record in the form of an Electronic Contract. 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