नक्षत्र के चरण कैसे जाने अर्थात कैसे निकालें – nakshatra ke charan

नक्षत्र के चरण कैसे जाने अर्थात कैसे निकालें - nakshatra ke charan

जन्म पत्रिका बनाने में तो नक्षत्र का चरण ज्ञात करना ही होता है किन्तु यदि जन्मपत्रिका न भी बनानी हो मात्र जन्मकाल का विवरण अंकित करना हो अर्थात जब जातक के जन्म होने पर पंडित जी से पतरा दिखाया जाता है तो भी चरण ज्ञात होना आवश्यक होता है। विधि को समझने के बाद अनुमान से भी ज्ञात हो जाता है किन्तु कई बार वास्तविक नहीं होता है। वास्तविक स्थिति हेतु नक्षत्र के चरण कैसे जाने (nakshatra ke charan); यहां पूरी विधि बताई गयी है।

“ज्योतिष सीखें” से संबंधित पूर्व के आलेखों को यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

जातक का नाम जिसे राशि नाम से भी जाना जाता है; इसका निर्धारण जन्म नक्षत्र के चरण को ज्ञात किये बिना नहीं किया जा सकता। यद्यपि राशिनाम से पुकारा नहीं जाता है किन्तु वास्तविक नाम राशिनाम ही होता है, व्यावहारिक जीवन में प्रयोग हेतु अन्य नाम भी रखा जाता है। सामान्य रूप से पुरोहित वर्ग ही राशिनाम रखते हैं और इसके लिये पुरोहितों को भी नक्षत्र का चरण जानना आवश्यक होता है क्योंकि बिना नक्षत्र चरण को जाने नामाक्षर ज्ञात नहीं हो सकता है अर्थात नाम के आदि अक्षर का निर्धारण नक्षत्र के चरण से ही किया जाता है।

नक्षत्र के चरण

प्रत्येक नक्षत्र के चार भाग किये जाते हैं जिसे चरण कहा जाता है अर्थात एक नक्षत्र में ४ चरण होते हैं। इसी प्रकार सवा दो नक्षत्र की एक राशि होती है अर्थात एक राशि में नक्षत्र के ९ चरण होते हैं और यदि राशिमाला (भचक्र) की बात करें तो उसमें कुल १०८ चरण होते हैं।

माला में १०८ मनके क्यों होते हैं क्या कभी यह विचार किया है आपने ? पृथ्वी के चारों और नक्षत्र माला है और इसमें कुल १०८ चरण होते हैं और माला में भी १०८ मनके होते हैं दोनों में घनिष्ट संबंध हैं।

यदि हम नक्षत्र के चरणों का अंशात्मक मान जानना चाहें तो इस प्रकार जान सकते हैं :

  • भचक्र में ३६० अंश हैं और यदि इसे १०८ भागों में बांटें तो ३/२० होता है।
  • एक नक्षत्र में १३/२० अंशादि को चार भागों में बांटे तो ३/२० होता है।
  • एक राशि के ३० अंश को ९ भागों बांटें तो ३/२० होता है।
  • अर्थात नक्षत्र के एक चरण का अंशात्मक मान ३ अंश २० कला है।

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नक्षत्र के चरण ज्ञात करने की विधि

नक्षत्र का चरण ज्ञात करने के लिये हमें भयात और भभोग की आवश्यकता होती है। भयात-भभोग ज्ञात करने की विधि हम पूर्व आलेख में पहले जान चुके हैं ।

  • नक्षत्र के चार चरण होते हैं इसलिये भभोग के चार भाग करें।
  • भयात जिस भाग में आये वही जन्म नक्षत्र चरण होता है।
  • इसके लिये हमें भयात में से क्रमशः भभोग का चतुर्थांश घटाना होता है, जितने भाग घट जायें वह व्यतीत चरण होता है और जो चतुर्थांश न घटे वह वर्तमान चरण होता है।
  • नक्षत्र चरण के अनुसार नाम का आदि अक्षर क्या होगा यह अवकहड़ा चक्र से ज्ञात होता है।

पूर्व आलेख में हमनें जो दो भयात भभोग ज्ञात किया था वो नीचे दिया गया है एवं उसी विवरण से हम नक्षत्र के चरणों को ज्ञात करेंगे :

  1. प्रथम अभ्यास : 2/4/2025, पंचमी, बुध, इष्टकाल ४/१७, जन्म नक्षत्र कृत्तिका, भयात ५४/०३, भभोग ५४/३२
  2. द्वितीय अभ्यास : 3/4/2025, षष्ठी, गुरु, इष्टकाल ४६/१३, जन्म नक्षत्र मृगशिरा, भयात ४५/३०, भभोग ५७/३७

प्रथम अभ्यास में भयात ५४/०३, भभोग ५४/३२ है इसमें स्पष्ट हो जाता है कि चतुर्थ चरण था। तथापि समझने के लिये हम ज्ञात करके देखते हैं :

हम भभोग ५४/३२ के चार भाग करते हैं तो १३/३८ ज्ञात होता है अर्थात चार चतुर्थांश १३/१८ के हैं, अब भयात ५४/०३ में से इसे घटाते हैं और जीतनी बार घटेगा उतना चरण व्यतीत होगा, और जो नहीं घटेगा वही चरण होगा :

  • , ५४/०३
  • – १३/३८ प्रथम चतुर्थांश अथवा प्रथम चरण
  • = ४०/२५
  • – १३/३८ द्वितीय चतुर्थांश अथवा द्वितीय चरण
  • = २६/४७
  • – १३/३८ तृतीय चतुर्थांश अथवा तृतीय चरण
  • = १३/०९ इसमें से नहीं घटेगा अर्थात यही चरण है।

शेष १३/०९ में से चतुर्थांश १३/३८ नहीं घटेगा किन्तु तीन बार घटा है अर्थात तीन चरण समाप्त हो गया है और चतुर्थ चरण में जन्म हुआ है क्योंकि चतुर्थ चतुर्थांश नहीं घटा है। अवकहड़ा चक्र में देखने पर हमें ज्ञात होता है कि कृतिका के चतुर्थ चरण में “ए” अक्षर है अर्थात नाम के आदि का अक्षर “ए” है।

दूसरे अभ्यास में भयात ४५/३० और भभोग ५७/३७ है। भभोग ५७/३७ को ४ से भाग देने पर १४/२४/१५ ज्ञात होता है जो एक चतुर्थांश है अर्थात एक चरण का मान है। यहां में विपल/विकला का त्याग नहीं करेंगे।

  • , ४५/३०/००
  • – १४/२४/१५ प्रथम चतुर्थांश अथवा प्रथम चरण
  • =३१/०५/४५
  • – १४/२४/१५ द्वितीय चतुर्थांश अथवा द्वितीय चरण
  • =१६/४१/३०
  • – १४/२४/१५ तृतीय चतुर्थांश अथवा तृतीय चरण
  • = २/१७/१५ इसमें से नहीं घटेगा अर्थात यही चरण है।

शेष २/१७/१५ में से चतुर्थांश १४/२४/१५ नहीं घटेगा किन्तु तीन बार घटा है अर्थात तीन चरण समाप्त हो गया है और चतुर्थ चरण में जन्म हुआ है क्योंकि चतुर्थ चतुर्थांश नहीं घटा है। अवकहड़ा चक्र में देखने पर हमें ज्ञात होता है कि मृगशिरा के चतुर्थ चरण में “कि” अक्षर है अर्थात नाम के आदि का अक्षर “कि” है।

विद्वद्जनों से आग्रह है कि आलेख में यदि किसी भी प्रकार की त्रुटि मिले तो हमें टिप्पणी/ईमेल करके अवश्य अवगत करने की कृपा करें।

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