प्रज्ञा पञ्चाङ्ग पूर्णतः नई वेबसाइट है और यहां ज्योतिष, पंचांग, व्रत पर्व, मुहूर्त्त आदि से संबंधित विमर्श किया जाता है। प्रज्ञा पञ्चाङ्ग दृश्य गणना को स्वीकार करता है एवं दृश्य पञ्चाङ्ग के आधार पर ही व्रत, पर्व, मुहूर्त आदि प्रस्तुत करता है।
प्रज्ञा पञ्चाङ्ग (दृक पंचांग) पर क्या-क्या है ?
प्रज्ञा पञ्चाङ्ग एक डिजिटल पञ्चाङ्ग है जो डिजिटल माध्यमों से प्राप्त दृश्य तिथ्यादि मान को ग्रहण करता है एवं तदनुसार व्रत-पर्व-मुहूर्त्त आदि का विवरण प्रस्तुत करता हैअर्थात दृक पंचांग है।
वर्त्तमान युग में दृश्य मान सहज व सर्वोपलब्ध हैं किन्तु परम्परागत पञ्चाङ्ग जो गणितागत भी होते हैं व उनके गणित को किसी प्रकार से त्रुटिपूर्ण नहीं कहा जा सकता किन्तु उसमें जिस संशोधन की आवश्यकता है वो नहीं करते और दृश्य को ही अस्वीकार करते हैं उनमें उपलब्ध तिथ्यादि मान अदृश्य होते हैं एवं उनकी अदृश्यता चंद्रोदय-चन्द्रास्त से सिद्ध भी हो जाती है। ऐसे में एक ऐसा पञ्चाङ्ग अपेक्षित हो जाता है जो दृश्य हो किन्तु परंपरागत स्वरूप में भी हो जिससे अवलोकन करना कठिन न हो।
प्रज्ञा पञ्चाङ्ग इसी अपेक्षा की पूर्ति करते हुये डिजिटल माध्यमों से सर्वोपलब्ध तिथ्यादि मानों को लेता है, अर्थात स्वयं का गणित नहीं करता है, एवं परम्परागत स्वरूप भी प्रस्तुत करता है जिससे अवलोकन करना सहज हो जाता है।
प्रज्ञा पञ्चाङ्ग में कुछ विशेष जानकारी भी उपलब्ध की जाती है; अर्द्धप्रहरा, अग्निवास, शिववास, मूलगण्डान्त (मिथिलादेशीय स्वीकृत प्रमाणानुसार) इत्यादि। हम व्रत, पर्व, मुहूर्तादि के निर्णय में पर्याप्त सजग रहते हैं तथापि त्रुटियां व विसंगतियां मानवीय स्वभाव है अतः त्रुटि-विसंगति संभावित है एवं उसके लिये सुझाव, परामर्श आमंत्रित करते हैं।
प्रज्ञा पञ्चाङ्ग (Pragya Panchang – Drik Panchang) युक्तियुक्त व प्रामाणिक तथ्य जो शास्त्रोचित हो प्रस्तुत करता है। तथापि त्रुटियां सदैव संभावित रहती है अतः यदि कोई त्रुटी दृष्टिगत हों अथवा कोई तथ्य प्रमाण के विरुद्ध हो, युक्तियुक्त न हो तो उसके बारे में हमें अवश्य अवगत करें जिससे परिष्कार किया जा सके, साथ ही यदि कोई ऐसा प्रकरण हो जो अपेक्षित हो पर अनुपलब्ध उसके बारे में भी अवगत करें और सनातन समाज हेतु ज्ञानगंगा बन सके। इस उद्देश्य की सिद्धि हेतु विद्वज्जनों की कृपा आवश्यक है अतः अपनी कृपा अवश्य प्रदान करें ।
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