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अदृश्य पंचांगों का खंडन

अदृश्य पंचांगों का खंडन – Rejection of nondrik panchang

अदृश्य पंचांगों का खंडन – Rejection of nondrik panchang : वर्त्तमान में अधिकांश पंचांग सूर्यसिद्धांत अथवा आधारित सिद्धांतों से ही किया जाता है, किन्तु कालभेद से इसमें भी संस्कार की अपेक्षा है जिसकी उपेक्षा की जाती है और अदृश्यता की सिद्धि होती है। उपरोक्त स्थिति में अदृश्यता को ही ग्राह्य सिद्ध करने का प्रयास किया जाता है एवं प्रमाणों का भी भ्रमजाल बुना जाता है जिसमें स्वयं ही अदृश्य समर्थक फंस जाते हैं।

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दृक् पंचांग की आवश्यकता अथवा सिद्धि - Value of Drik Panchang

दृक् पंचांग की आवश्यकता अथवा सिद्धि – Value of Drik Panchang

दृक् पंचांग की आवश्यकता अथवा सिद्धि – Value of Drik Panchang : प्रमाणों एवं तर्क के आधार पर अंततः सिद्ध यही होता है कि दृश्य गणना ही स्वीकार्य है। प्राचीन काल में छाया-जलयंत्र आदि अनेक विधियों से दृश्य की पुष्टि की जाती थी आधुनिक काल में यदि सैटेलाइट है तो इससे पुष्टि होनी ही चाहिए। वही दृश्य गणना महत्वपूर्ण एवं ग्राह्य है जिसकी यंत्रादि से पुष्टि हो सके एवं आर्षमत में सदैव ऐसा आदेश भी किया गया है ।

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