अग्नि वास चार्ट मई – Agni Was May 2025
अग्नि वास चार्ट मई – Agni Was May 2025 : वैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्थी से ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी तक
अग्नि वास चार्ट मई – Agni Was May 2025 : वैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्थी से ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी तक
ज्योतिष: भूत, वर्तमान और भविष्य का संगम – jyotish kya hai : ज्योतिष को कालज्ञान भी कहा जाता है, लगध के वेदाङ्ग ज्योतिष में “कालज्ञानं प्रवक्ष्यामि” मिलता है। कालज्ञान का तात्पर्य काल गणना, काल निर्धारण, शुभाशुभ काल आदि होता है।
मकर संक्रांति 2025: तिथि, महत्व और उत्सव सब कुछ जानें : मकर संक्रांति हर्षोल्लास का पर्व है, इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन आरंभ होता है। संक्रांति का पुण्यकाल विशेष उपयोगी होता है जिसमें स्नान-दान-पूजा आदि करना विशेष कल्याणकारी होता है। वर्ष 2025 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी।
अग्नि वास चार्ट अप्रैल – Agni Was April 2025 : चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया से वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तक
आषाढ़ माह का पंचांग 2025, 12 Jun 2025 – 10 Jul 2025 Ashadha mah ka panchang : शक १९४७, संवत २०८२, दिनांक १२/०६/२०२५ से १०/०७/२०२५ तक, अशुद्ध, ग्रीष्म ऋतु, सौम्य गोल, सौम्यायन, काल – पश्चिम
ज्येष्ठ माह का पंचांग 2025, 13 May 2025 – 11 Jun 2025 Jyeshtha mah ka panchang : शक १९४७, संवत २०८२, दिनांक १३/०५/२०२५ से ११/०६/२०२५ तक, शुद्ध, वसंत ऋतु, सौम्य गोल, सौम्यायन, काल – दक्षिण
वैशाख माह का पंचांग 2025, 14 Apr 2025 – 12 May 2025 vaishakh mah ka panchang : वैशाख मास का पंचांग 2025 : शक १९४७, संवत २०८२, दिनांक १४/०४/२०२५ से १२/०५/२०२५ तक, शुद्ध, वसंत ऋतु, सौम्य गोल, सौम्यायन, काल – दक्षिण
प्रज्ञा पंचांग : चैत्र मास का पंचांग 2025, 15 Mar 2025 – 13 Apr 2025 Chaitra Drik Panchang : शक १९४६, संवत २०८१ – २०८२, दिनांक १५/०३/२०२५ से १३/०४/२०२५ तक, शुद्ध (१६ मार्च-२६ मार्च अशुद्ध तत्पश्चात पुनः शुद्ध), वसंत ऋतु, याम्य गोल, सौम्यायन, काल – दक्षिण
शुभ मुहूर्त – Shubh Muhurt 2025 : मुंडन मुहूर्त 2025, कर्णवेध मुहूर्त 2025, उपनयन मुहूर्त 2025, विवाह मुहूर्त 2025, द्विरागमन मुहूर्त 2025, गृहारम्भ मुहूर्त 2025, गृहप्रवेश मुहूर्त 2025, देवादि प्रतिष्ठा (प्राण प्रतिष्ठा) मुहूर्त 2025
अग्नि वास चार्ट मार्च – Agni Was March 2025 : फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा चैत्र से चैत्र कृष्ण पक्ष द्वितीया तक