अग्नि वास चार्ट दिसंबर – Agni Was December 2025
अग्नि वास चार्ट दिसंबर – Agni Was December 2025 : मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी से पौष शुक्ल पक्ष द्वादशी तक, दिसंबर 2025 में कुल 22 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 8 दिन है।
अग्नि वास चार्ट दिसंबर – Agni Was December 2025 : मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी से पौष शुक्ल पक्ष द्वादशी तक, दिसंबर 2025 में कुल 22 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 8 दिन है।
अग्नि वास चार्ट नवम्बर – Agni Was November 2025 : कार्तिक शुक्ल पक्ष दशमी से मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी तक, नवम्बर 2025 में कुल 24 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 5 दिन है।
अग्नि वास चार्ट अक्टूबर – Agni Was October 2025 : आश्विन शुक्ल पक्ष नवमी से कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी तक, अक्टूबर 2025 में कुल 25 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 7 दिन है।
अग्नि वास चार्ट सितम्बर – Agni Was September 2025 : भाद्र शुक्ल पक्ष नवमी से आश्विन शुक्ल पक्ष अष्टमी तक, सितम्बर 2025 में कुल 20 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 9 दिन है।
अग्नि वास चार्ट अगस्त – Agni Was August 2025 : श्रावण शुक्ल पक्ष अष्टमी से भाद्र शुक्ल पक्ष अष्टमी तक, अगस्त 2025 में कुल 23 दिन अग्निवास है जिसमें से सम्पूर्ण दिन का अग्निवास 11 दिन है।
अग्नि वास चार्ट जुलाई – Agni Was July 2025 : आषाढ़ शुक्ल पक्ष षष्ठी से श्रावण शुक्ल पक्ष सप्तमी तक
अग्नि वास चार्ट जून – Agni Was Jun 2025 : ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष षष्ठी से आषाढ़ शुक्ल पक्ष पंचमी तक
घात चक्र क्या होता है आईये जानते हैं – ghat chakra : व्यक्ति के जीवन में घाट चक्र (ghat chakra) का भी बड़ा महत्व होता है और इस कारण से जन्मपत्रिका में अर्थात जन्मकुंडली में घात चक्र का भी वर्णन और विचार किया जाता है। शास्त्रों में कुछ विशेष मास, तिथि, नक्षत्र, राशि योग, करण, प्रहर घातक होते हैं और घात चक्र द्वारा हम इन्हें समझ सकते हैं कि जातक के लिये कौन-कौन घातक है।
अवकहड़ा चक्र क्या होता है व देखने की विधि : avakhada chakra : प्रायः अवकहड़ा भी बोलते सुनते देखा जाता है किन्तु ये अवकहड़ा नहीं अवकहडा है। आर्य मातृका से वर्ण लिया गया है जिसका दो वर्ग होता है ४ – ४ वर्णों का और ५ – ५ वर्णों का। अवकहडा में ५ – ५ वर्णों का वर्ग लिया गया है जो इस प्रकार है अवकहड, मटपरत, नयभजख और गसदचल।
नक्षत्र के चरण कैसे जाने अर्थात कैसे निकालें – nakshatra ke charan : यदि जन्मपत्रिका न भी बनानी हो मात्र जन्मकाल का विवरण अंकित करना हो अर्थात जब जातक के जन्म होने पर पंडित जी से पतरा दिखाया जाता है तो भी चरण ज्ञात होना आवश्यक होता है।