ग्रहों की जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति अवस्था और उनके फल - jagrat swapna sushupti

ग्रहों की जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति अवस्था और उनके फल – jagrat swapna sushupti

ग्रहों की जाग्रत स्वप्न सुषुप्ति अवस्था और उनके फल – jagrat swapna sushupti : ग्रहों की अवस्था में दीप्तादि अवस्था, बालादि अवस्था का विचार मुख्यतः किया जाता है जिसका वर्णन बृहत्पराशरहोराशास्त्रम् में मिलता है। इसके साथ ही एक अन्य अवस्था का भी वर्णन मिलता है जो जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति (jagrat swapna sushupti) अवस्था है।

Read More
ग्रहों की अवस्थाएं (graho ki avastha) : बाल, कुमार, युवा, वृद्ध और मृत

ग्रहों की अवस्थाएं (graho ki avastha) : बाल, कुमार, युवा, वृद्ध और मृत

ग्रहों की अवस्थाएं (graho ki avastha) : बाल, कुमार, युवा, वृद्ध और मृत – ग्रहों की अवस्था को दो प्रकार की होती है एक वयावस्था (बालादि) और दूसरी भावनात्मक या मानसिक (दीप्तादि), यहां हम ग्रहों के इसी बालादि अवस्था को समझने का प्रयास करेंगे और ज्योतिष ग्रंथों में इसके क्या वर्णन हैं उनको भी समझने का प्रयास करेंगे।

Read More
ग्रहों की अवस्था (grahon ki avastha) : दीप्त, स्वस्थ, प्रमुदित, शांत, दीन, दुःखित, विकल, खल और कुपित

ग्रहों की अवस्था (grahon ki avastha) : दीप्त, स्वस्थ, प्रमुदित, शांत, दीन, दुःखित, विकल, खल और कुपित

ग्रहों की अवस्था (grahon ki avastha) : दीप्त, स्वस्थ, मुदित, शान्त, शक्त, निपीडित, भीत, विकल, खल –

Read More
घात चक्र क्या होता है आईये जानते हैं - ghat chakra

घात चक्र क्या होता है आईये जानते हैं – ghat chakra

घात चक्र क्या होता है आईये जानते हैं – ghat chakra : व्यक्ति के जीवन में घाट चक्र (ghat chakra) का भी बड़ा महत्व होता है और इस कारण से जन्मपत्रिका में अर्थात जन्मकुंडली में घात चक्र का भी वर्णन और विचार किया जाता है। शास्त्रों में कुछ विशेष मास, तिथि, नक्षत्र, राशि योग, करण, प्रहर घातक होते हैं और घात चक्र द्वारा हम इन्हें समझ सकते हैं कि जातक के लिये कौन-कौन घातक है।

Read More
अवकहड़ा चक्र क्या होता है व देखने की विधि : avakhada chakra

अवकहड़ा चक्र क्या होता है व देखने की विधि : avakhada chakra

अवकहड़ा चक्र क्या होता है व देखने की विधि : avakhada chakra : प्रायः अवकहड़ा भी बोलते सुनते देखा जाता है किन्तु ये अवकहड़ा नहीं अवकहडा है। आर्य मातृका से वर्ण लिया गया है जिसका दो वर्ग होता है ४ – ४ वर्णों का और ५ – ५ वर्णों का। अवकहडा में ५ – ५ वर्णों का वर्ग लिया गया है जो इस प्रकार है अवकहड, मटपरत, नयभजख और गसदचल।

Read More
नक्षत्र के चरण कैसे जाने अर्थात कैसे निकालें - nakshatra ke charan

नक्षत्र के चरण कैसे जाने अर्थात कैसे निकालें – nakshatra ke charan

नक्षत्र के चरण कैसे जाने अर्थात कैसे निकालें – nakshatra ke charan : यदि जन्मपत्रिका न भी बनानी हो मात्र जन्मकाल का विवरण अंकित करना हो अर्थात जब जातक के जन्म होने पर पंडित जी से पतरा दिखाया जाता है तो भी चरण ज्ञात होना आवश्यक होता है।

Read More
दशम लग्न, भाव मध्य, भाव संधि कैसे बनाते हैं ~ bhav chalit kundali

दशम लग्न, भाव मध्य, भाव संधि कैसे बनाते हैं ~ bhav chalit kundali

दशम लग्न, भाव मध्य, भाव संधि कैसे बनाते हैं ~ bhav chalit kundali : सामान्य रूप से चलित कुंडली नहीं बनायी जाती है किन्तु जिन्हें चलित कुंडली भी बनानी हो उन्हें सर्वप्रथम दशम लग्न साधन, भाव स्पष्ट अथवा भाव मध्य, भाव संधि आदि ज्ञात करके भाव विस्तार को समझना आवश्यक होता है।

Read More
नवमांश कुंडली कैसे बनाते हैं - navmansh kundli

षडवर्ग क्या है, सप्तवर्गीय जन्मपत्रिका व षोडश वर्ग कुंडली कैसे बनाते हैं : shodash varga kundali

षडवर्ग क्या है, सप्तवर्गीय जन्मपत्रिका व षोडश वर्ग कुंडली कैसे बनाते हैं : shodash varga kundali : जातक ज्योतिष में अतिसूक्ष्म विचार करने अथवा फलादेश करने के लिये सामान्य जन्म कुंडली, राशि कुंडली और नवांश कुंडली से आगे बढ़ने पर षोडश वर्ग कुंडली (shodash varga kundali) तक का विचार किया जाता है एवं यहां इन सबको एक साथ समझने का प्रयास करेंगे।

Read More
नवमांश कुंडली कैसे बनाते हैं - navmansh kundli

नवमांश कुंडली कैसे बनाते हैं – navmansh kundli

नवमांश कुंडली कैसे बनाते हैं – navmansh kundli : यदि षोडश वर्ग अथवा षड्वर्ग न भी बनाया जाय तो भी बहुत सारे ज्योतिषी नवांश कुंडली बनाते हैं। इस आलेख में नवांश कुंडली क्या है यह बताया गया है, नवांश कुंडली कैसे बनायी जाती है यह भी बताया गया है एवं सीखने के लिये उदाहरण भी दिया गया है।

Read More
स्थानीय प्रथम लग्न सारणी निर्माण विधि - lagna sarani nirman

स्थानीय प्रथम लग्न सारणी निर्माण विधि – lagna sarani nirman

स्थानीय प्रथम लग्न सारणी निर्माण विधि – lagna sarani nirman : स्थानीय लग्न सारणी उपलब्ध न होने के कारण निकटतम स्थानों की बनी लग्न सारणी जो पंचांगों में उपलब्ध होती है से लग्न ज्ञात करना होता है जो कई स्थितियों में त्रुटिपूर्ण भी हो सकता है। इसलिये स्पष्ट लग्नानयन हेतु स्थानीय लग्नसारणी की आवश्यकता होती है और इस आलेख में स्वयं ही स्थानीय लग्नसारणी का निर्माण कैसे कर सकते है बताया गया है।

Read More