ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें - भाग 1

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें – भाग 1

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें – भाग 1 – jyotish seekhen : ज्योतिष विद्या वेदाङ्ग विद्या है और ज्योतिष सीखना एवं ज्योतिर्विद अथवा दैवज्ञ बनना दो भिन्न विषय है। ज्योतिष के तीन स्कंध कहे गये हैं सिद्धांत, संहिता और होरा। ज्योतिष सीखने का मुख्य तात्पर्य होरा के अंतर्गत कुंडली निर्माण करना और फलादेश करना समझा जाता है तथापि सामान्य ज्योतिषी बनने के लिये भी सिद्धांत व संहिता का भी सामान्य ज्ञान अनिवार्य होता है।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें - learn astrology in hindi

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें – learn astrology in hindi

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिन्दी में ज्योतिष सीखें – learn astrology in hindi : यहां ज्योतिष सीखने में सहयोग हेतु आपको शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ सामग्रियां प्राप्त होंगी किन्तु जैसे आप चिकित्सा शास्त्र की पुस्तकों का अध्ययन करके चिकित्सक नहीं बन सकते उसी प्रकार ज्योतिष की पुस्तकों का अध्ययन मात्र करके ज्योतिषी नहीं बन सकते हैं।

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ज्योतिष: भूत, वर्तमान और भविष्य का संगम - jyotish kya hai

ज्योतिष: भूत, वर्तमान और भविष्य का संगम – jyotish kya hai

ज्योतिष: भूत, वर्तमान और भविष्य का संगम – jyotish kya hai : ज्योतिष को कालज्ञान भी कहा जाता है, लगध के वेदाङ्ग ज्योतिष में “कालज्ञानं प्रवक्ष्यामि” मिलता है। कालज्ञान का तात्पर्य काल गणना, काल निर्धारण, शुभाशुभ काल आदि होता है।

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शुभ मुहूर्त - Shubh Muhurt 2025

शुभ मुहूर्त – Shubh Muhurt 2025

शुभ मुहूर्त – Shubh Muhurt 2025 : मुंडन मुहूर्त 2025, कर्णवेध मुहूर्त 2025, उपनयन मुहूर्त 2025, विवाह मुहूर्त 2025, द्विरागमन मुहूर्त 2025, गृहारम्भ मुहूर्त 2025, गृहप्रवेश मुहूर्त 2025, देवादि प्रतिष्ठा (प्राण प्रतिष्ठा) मुहूर्त 2025

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देशांतर - Deshantar

देशांतर – Longitude

देशांतर – Deshantar : सभी पंचांगों में किसी न किसी स्थान विशेष के अक्षांश और रेखांश के आधार पर गणना की जाती है एवं उसमें दिये गये सूर्योदय-सूर्यास्त उसी स्थान विशेष के होते हैं। उस स्थान के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर सूर्योदयास्त में 4 मिनट का प्रतिरेखांश होता है इसी अंतर को देशांतर कहा जाता है।

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प्रज्ञा पंचांग देखने की विधि - Panchang dekhne ki vidhi

प्रज्ञा पंचांग देखने की विधि – Panchang dekhne ki vidhi

प्रज्ञा पंचांग देखने की विधि – Panchang dekhne ki vidhi : सभी पंचांगों की प्रथम सारणी में ऊपर के दाहिने कोने में मास, पक्ष, अयन, गोल, ऋतु, शुद्धाशुद्ध, काल दिशा एवं आंग्ल दिनांक आदि दिया जाता है। प्रज्ञा पंचांग में इसी का ध्यान रखते हुये ऊपर के दाहिने कोने में उपरोक्त विवरण दिया गया है।

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दृक पंचांग अर्थात् डिजिटल प्रज्ञा पंचांग की आवश्यकता - Need for Prajna Panchang

दृक पंचांग अर्थात् डिजिटल प्रज्ञा पंचांग की आवश्यकता – Need for Pragya Panchang/Drik Panchag

दृक पंचांग अर्थात् डिजिटल प्रज्ञा पंचांग की आवश्यकता – Need for Prajna Panchang : ऐसे दृक पंचांग (Drik Panchang) की आवश्यकता होती है जो उपयोगकर्ताओं के अनुकूल हो क्योंकि उपलब्ध दृक पंचांगों में अनेकों दोष देखे जाते हैं जिसके कारण उपयोगकर्ताओं के लिये ग्राह्य सिद्ध नहीं होते। इसी कारण प्रज्ञा पंचांग प्रकाशित किया जा रहा है जिसे अधिकाधिक दोषों का निवारण करते हुये उपयोगकर्ताओं के अनुकूल और सहज उपयोग के योग्य बनाने का प्रयास किया गया है।

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अदृश्य पंचांगों का खंडन

अदृश्य पंचांगों का खंडन – Rejection of nondrik panchang

अदृश्य पंचांगों का खंडन – Rejection of nondrik panchang : वर्त्तमान में अधिकांश पंचांग सूर्यसिद्धांत अथवा आधारित सिद्धांतों से ही किया जाता है, किन्तु कालभेद से इसमें भी संस्कार की अपेक्षा है जिसकी उपेक्षा की जाती है और अदृश्यता की सिद्धि होती है। उपरोक्त स्थिति में अदृश्यता को ही ग्राह्य सिद्ध करने का प्रयास किया जाता है एवं प्रमाणों का भी भ्रमजाल बुना जाता है जिसमें स्वयं ही अदृश्य समर्थक फंस जाते हैं।

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दृक् पंचांग की आवश्यकता अथवा सिद्धि - Value of Drik Panchang

दृक् पंचांग की आवश्यकता अथवा सिद्धि – Value of Drik Panchang

दृक् पंचांग की आवश्यकता अथवा सिद्धि – Value of Drik Panchang : प्रमाणों एवं तर्क के आधार पर अंततः सिद्ध यही होता है कि दृश्य गणना ही स्वीकार्य है। प्राचीन काल में छाया-जलयंत्र आदि अनेक विधियों से दृश्य की पुष्टि की जाती थी आधुनिक काल में यदि सैटेलाइट है तो इससे पुष्टि होनी ही चाहिए। वही दृश्य गणना महत्वपूर्ण एवं ग्राह्य है जिसकी यंत्रादि से पुष्टि हो सके एवं आर्षमत में सदैव ऐसा आदेश भी किया गया है ।

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